Bhagvat Aarti

Lyrics of Bhagvat Aarti

Bhagvat Aarti
भागवत भगवान की आरती | पापियोन को पाप से है तारती ||
ये अमर ग्रन्थ तु मुक्ति पन्थ वे पंचम वेद निराला, नव ज्योति जगाने वाला |
है गण या वरदान याही, जग के मंगल की आरती ||
भागवत भगवान की आरती | पापियोन को पाप से है तारती ||
ये शान्ति गित पावन पुनीत सरपों को मिटेने वाला | हरि दरश दीखें वाला ||
है शुभ कर्णी है दुख हरनी तुम मधुसूदन की आरती ||
भागवत भगवान की आरती | पापियोन को पाप से है तारती ||
ये माधुर बोल जग फाँद खोल मनमर्ग दीखने वाला, बिगारी को केला वाला |
श्री भगवत भगवान यानि घनश्याम याही सब की महिमा की आरती ||
भागवत भगवान की आरती | पापियोन को पाप से है तारती ||

How to Use:- For Bhagvat Arti, take bath then lighten the lamp or earthen the lamp(best), offer some sweets and start chanting the Arti. Chant Bhagwat Arti in morning, best time is before 6:00 AM.

Aarti Sangrah


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